फेक न्यूझ के चलते मेइनस्ट्रीम मीडिया शंका के दायरे में

फेक न्यूझ के चलते मेइनस्ट्रीम मीडिया शंका के दायरे में

by Jaywant Pandya

सॉशियल मीडिया के आने के बाद मेइनस्ट्रीम मीडिया का आरोप है कि सॉशियल मिडिया झूठी खबरें फैलाता है। दूसरी ओर सॉशियल मिडिया के कारण मेइनस्ट्रीम मीडिया कई बार आपाधापी में या जानबूझकर फेक न्यूझ चलाता है (जैसे गुजरात के दलित प्रदीप राठोड की हत्या के बारे में बिना झांच पहेले दिन से फेक न्यूझ चलाया गया लेकिन बाद में सच्चाई कुछ ओर ही आई) वो बहार आने लगा है।

आज तक और इन्डिया टूडे दोनों नंबर वन कहे जाने वाले चैनल है। मेगेझिन के रूप में भी इन्डिया टूडे एक प्रतिष्ठित नाम है। टॅक्नॉलॉजी हो या खबर को प्रस्तुत करने का तरीका, डिबेट हो या कोई मुद्दे पर विशेष कार्यक्रम, इन की एक अपनी स्टाइल होती है। जब २४ घंटे की चैनल नई नई थी तो मुझे याद आता है कि आज तक से प्रबल प्रताप सिंह को अफघानिस्तान अमरिका के हमले के दौरान रिपॉर्टिंग के लिए भेजा गया था।

लेकिन अभी कुछ बातें जो ध्यान में आई है वह चिंताजनक है। आज तक और इन्डिया टूडे ग्रूप के तंत्री और स्वामी अरुण पुरी और उनकी बहन मधु त्रेहान जो न्यूझ लॉन्ड्री वेबसाइट चलाती है, उन्हों ने दो खबरों में एक तरफा गलत एजन्डा चलाया है एसा सामने आया है। वह भी जेएनयु मामले में।

न्यूझ लॉन्ड्री ने एक खबर चलाई जिस में एक डॉक्टर को क्वॉट कर के बताया गया कि जेएनयू हिंसा में एबीवीपी के छात्रो को मामूली चोट आई थी। लेकिन जिस डॉक्टर को क्वॉट किया गया वह डॉक्टर हरजितसिंह भाटी एइम्स के वर्तमान डॉक्टर नहीं है! तो वह एइम्स की तरफ से कैसे कुछ बता सकते है? दूसरा, वह कॉंग्रेस के ऑल इन्डिया मेडिकल सेल के नेशनल कन्वीनर है। एसा ओपीइन्डिया का दावा है।

(1) www.opindia.com/2020/01/jnu-violence-abvp-left-aiims-doctor-newslaundry-injury-superficial/

(2) जेएनयु हिंसा मामले में इन्डिया टूडे के राहुल कंवल ने स्टिंग ऑपरेशन दिखलाया। उस में केमेरा की तारीख अक्तूबर 2019 की दिखाई पडती है (इस बात के सामने आने के बाद बेचारे विडियो एडिटर को भारी डाँट पडी होगी)। तो प्रश्न यह उठता है कि क्या 5 जनवरी की हिंसा का स्टिंग अक्तूबर में पहेले किया गया था?

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इस में जिस को एबीवीपी कार्यकर्ता दिखाया गया है वह अक्षत अवस्थी ने अपने एबीवीपी के जूडे होने से मना किया है।

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यह बात खुल्ली पडने पर राहुल कंवल ने ट्विटर पर बचाव में जो तसवीर एबीवीपी की रेली की रखी वह तसवीर वास्तव में जेएयू छात्रसंघ की फी बढौती पर रेली की नीकली जो इन्डिया टूडे ने स्वयं छापी थी! और यह छात्रसंघ की अध्यक्षा आईशी घोष की अब तो पुलीस ने हमलावर के रूप में पहचान की है।

इस से पहले यह याद दिलाना जरूरी है कि आज तक के पुण्य प्रसून बाजपेयी अरविंद केजरीवाल के इन्टरव्यू के बारे में तो 2014 में पता चल गया था कि कितने क्रांतिकारी है। लेकिन आज तक ने इस से शर्म न अनुभव करते हुए इस के बाद भी पुण्य प्रसून को अपने पद पर चालु रखा था। ओर तो ओर, अपने एक कार्यक्रम का नाम ही ‘क्रांतिकारी बहोत क्रांतिकारी’ रख डाला! पुण्य प्रसून वाजपेयीने एक दूसरी चैनल पर भी छत्तीसगढ की एक कृषक महिला चंद्रमणि को गलत तरीके से दिखा के एसा साबित करने का प्रयास किया था कि उस की आय दो गुनी नहीं हुई है। लेकिन उस महिला चंद्रमणिने बाद में पुण्य प्रसून वाजपेयी की उस रिपॉर्ट को गलत बता दिया था।

यह बहोत ही चिंताजनक है। मेइनस्ट्रीम मीडिया की स्थिति डिजिटल माध्यमों की बाढ से वैसे भी खराब है। एसे में उस को अपने काम में बहोत सावधानी रखनी होगी।

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