धृतराष्ट्र के स्वप्न में राजा भरत ने आकर जो प्रश्न किया वह नेहरु-गांधी परिवार को हुआ होगा?

धृतराष्ट्र के स्वप्न में राजा भरत ने आकर जो प्रश्न किया वह नेहरु-गांधी परिवार को हुआ होगा?

by Jaywant Pandya
महाभारत की कहानी, वही भारत की कहानी – लेखांक ६
आज (२४ अप्रैल २०२०) के एपिसोड में दिखाया गया कि धृतराष्ट्र को डर सता रहा है। वे चाहते है कि पांडव अज्ञातवास में पकडे जाएं ताकि उन को दूसरे १२ वर्ष वनवास में बिताने पडे। गांधारी उन को एसा न सोचने के लिए कहती है किन्तु वह दुर्योधन के प्रति मोह का त्याग नहीं कर पाते।
उन को स्वप्न में राजा भरत आते है जिन के नाम पर से इस देश का नाम भारत रखा गया। भरत ने अपने छह में से किसी पुत्र को उचित न पाते हुए भारद्वाज के पुत्र वितथ को राज्य सत्ता सोंपी थी। किन्तु धृतराष्ट्र आते आते यह परंपरा बदल गई। धृतराष्ट्र को नेत्रहीनता के कारण राज्यसत्ता नहीं मिली थी। किन्तु पांडु को शाप मिलने के कारण वह राज्यसत्ता के लिए अपने आप को वनवास का दंड देते है और धृतराष्ट्र को राज्यसत्ता सोंपते है। एसे में धृतराष्ट्र अब अपने और अपने पश्चात अपने पुत्र के हाथ से राज्य सत्ता जाने नहीं देना चाहते।
किन्तु वे जानते है कि सत्य क्या है। इस लिए स्वप्न में राजा भरत एक वादी (फरियादी) की तरह आते है। वह कहते है कि वर्तमान अतीत का उत्तरदायी (जवाबदेही) है। उनको उत्तर देना चाहिए कि वे अपने पुत्रमोह के कारण भरतवंश का नाम क्यों डूबो रहे है और हस्तिनापुर का अहित क्यों कर रहे है? धृतराष्ट्र (और दुर्योधन भी) की हिम्मत द्रौपदी वस्त्राहरण के समय भीष्म, द्रौण, कृपाचार्य के मौन रहेने के कारण खुल चूकी है। अतः वे स्वप्न में भी अपने पितामह भरत को उत्तर देते हुए निर्लज्जता से कहते है कि आप के समय आपने अपने पुत्र को छोड किसी ओर को सत्ता दे दी थी, किन्तु अब एसा नहीं होगा। युग परिवर्तन के साथ परंपरा भी बदलती है।
यहां पर आधुनिक भारत के साथ इस को जोडें तो प्रश्न उठता है कि क्या मोतीलाल नेहरु को कोई भरत राजा स्वप्न में आये होंगे? जवाहरलाल नेहरु को कोई भरत राजा स्वप्न में आये होंगे? ईन्दिरा गांधी को कोई भरत राजा स्वप्न में आये होंगे? जिस कॉंग्रेस ने राजीव गांधी के पश्चात सीतराम केसरी की दुर्दशा कर के सोनिया गांधी को कॉंग्रेस अध्यक्षा बना दिया उन को स्वप्न में भरत राजा आये होंगे? राहुल गांधी को जब जयपुर में २०१३ में उपाध्यक्ष बनाया होगा तब सोनिया गांधी को कोई राजा भरत स्वप्न में आने से रहे क्योंकि वे इस परंपरा से नहीं है।
उल्लेखनीय है कि १९२८ में प्रगट रूप से मोतीलाल नेहरुने गांधीजी को पत्र लिखकर संकेत किया था कि किसी वृद्ध (सरदार पटेल) के हाथों में कॉंग्रेस की बागडौर न सोंप कर किसी युवा (जवाहरलाल नेहरु) को कॉंग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहिए। इसी वर्ष कोलकाता सत्र में कॉंग्रेसने मोतीलाल को अपना अध्यक्ष चूना था। इस के बाद के वर्ष अर्थात् १९२९ में जवाहरलाल को कॉंग्रेस अध्यक्ष लाहोर सत्र में चूना गया था। ईन्दिरा गांधी १९५९ में जवाहरलाल नेहरु के जीते जी कॉंग्रेस अध्यक्षा बन गई थीं। ईन्दिरा जीने जीते जी संजय गांधी को अपना उत्तराधिकारी जैसा बना दिया था। और संजय की मृत्यु होने के पश्चात एवम् ईन्दिरा जी की हत्या होने के पश्चात कॉंग्रेसने किसी वरिष्ठ को न चुनते हुए राजीव गांधी को प्रधानमंत्री मनोनीत कर लिया था।
आज के एपिसोड में एक ओर बात देखने को मिली। जो अन्याय करता है वह स्वयं कभी आनंदित हो कर और संतोष मानकर जी नहीं सकता। उस को हंमेशां डर रहता है कि जिस के साथ अन्याय हुआ है वह कभी भी उस के साथ बदला ले सकता है। धृतराष्ट्र के उपरांत दुर्योधन की भी यही मनोदशा है। वह कहता है कि वह चिंतित इस लिए है क्योंकि वह भीम के हाथों मरना नहीं चाहता। अतः उसे भी पूरा विश्वास है कि यदि युद्ध हुआ तो पांडव ही विजयी होंगे और बलशाली भीमसेन उस को मार डालेगा।
इस ओर, पांडव अज्ञात वास में मत्स्य देश में राजा विराट के वहां अलग-अलग काम करते है। द्रौपदी महाराणी की दासी बन जाती है। अर्जुन स्त्री वेश लेकर बृहन्नला बनकर राजकुमारी की नृत्यगुरु (डान्स टीचर, यू नॉ) बन जाता है। भीमसेन रसोइया बन जाता है। सहदेव गौशाला और नकुल अश्वशाला में काम पर रह जाता है। युधिष्ठिर कंक नामक ब्राह्मण बन जाता है। अर्जुन को स्वर्ग लोक में चित्रसेन द्वारा जो कला सिखने को पिता ईन्द्र ने कहा था, वह आज उस को काम लगती है। उर्वशी ने जो शाप दिया था वह उस को काम लगता है। इस लिए यह समजना चाहिए कि यदि हमारी दुर्दशा न करे नारायण, हो जाए तो वह भी आशीर्वाद बन सकती है। यदि श्री राम को वनवास न मिलता तो वह वन में सायन्टिफिक रिसर्च के जैसे यज्ञ कर रहे ऋषिमुनिओं को परेशान करनेवाले आतंकवादी/विदेशी एजन्ट जैसे राक्षसों को और उनका मुखिया रावण का नाश कैसे करते? उत्तर के अयोध्या के श्री राम द्वारा दक्षिण रामेश्वरम् को उत्तर के साथ कैसे जोडा जाता?
आधुनिक भारत की कहानी में एक ओर साम्यता दिखने को यह मिलती है कि पांडवो के मार्ग में लाक्षागृह से लेकर अज्ञातवास तक जो भी विघ्न आये, उस में से वे ओर मजबूत होकर बहार निकले। २००२ से २०१४ तक नरेन्द्र मोदी के मार्ग में मुस्लिम-हिन्दू दंगे, दंगो के सुप्रीम कॉर्ट में केस, एसआईटी, ६ घंटे पूछताछ, जासूसी कांड, गृह राज्य मंत्री अमित शाह की एन्काउन्टर केस में गिरफ्तारी, उस के बाद गुजरात बहार रहने का आदेश…आदि जीतने भी विघ्न आये वह ओर मजबूत होकर बहार निकले। यहां किसी को पांडव अथवा किसी को दुर्योधन कहने का अर्थ नहीं है। केवल वर्तमान राजनीति की महाभारत की कहानी से साम्यता जो दिखती है उस का उल्लेख मात्र है।

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