Budget 2020: ८०-९० के दशकों के नेताओं की प्रतिक्रिया

Budget 2020: ८०-९० के दशकों के नेताओं की प्रतिक्रिया

by Jaywant Pandya

पेरौडी

तनिक कल्पना करिए यदि ८०-९० के दशक के नेता टाइम ट्रावैल कर के अपने उसी रूप में आतें तो आज के बही खाता पर उनकी प्रतिक्रिया क्या होती? (स्वर्गस्थ और जीवित लोगों की क्षमा के साथ)

राजीव गांधी: हमें देखना है कि जब हमारा देश स्वतंत्रता के पचहत्तर साल मना रहा हो तब हमारे देश का अर्थतंत्र (सोनियाजी आर के धवन से: What is this अरठटंतर?) पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनोमी बन चूका होगा। हमारा उद्देश्य है कि भारत सुपर पावर बनें। हमने इस लिए ‘मेरा भारत महान’ एसा कैंपेन भी चलाया है। हमारी वित्त मंत्री निर्मलाजी अस्वस्थ होते हुए भी जो पूरा बजेट प्रवचन दिया उस की भरपूर प्रशंसा होनी चाहिए। जय हिंद।

नरसिंह राव : This is all round development budget taking care of all corners of the society. Mrs. Seetaraman has played balancing game very well. This will certainly take India forward towards top three economies.

शरद पवार : मि काय म्हणतो हे अर्थसंकल्प तरुणांची स्वप्ने पूर्ण करनार आहे। या अर्थसंकल्प समाजाच्या सर्व घटकांची काळजी घेणारा सर्वंकष आहे।

अटलबिहारी वाजपेयी : पीछली बार बजेट को वहीखाता नाम दिया उस का स्वागत होना चाहिए (pause) और फरवरी के अंतिम दिन ही वहीखाता को प्रस्तुत करने का क्रम तोडकर अंग्रेज परंपरा तोडने के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी को अभिनंदन देता हूं किन्तु (pause) ये जो परिस्थिति विश्व के भीतर है उसे नीपटने के लिए पर्याप्त कदम उठाये गये हैं क्या, यह हमें विचार करना होगा।

लालकृष्ण आडवाणी : हिन्दूस्थान आज कई संकटो से लड रहा है। इस में वित्त संकट भी है। मैं मानता हूं कि इस वही खाता में भारतीय जीवन बीमा निगम समेत इकाईयों में विनिवेश के कदम एकतरफ सरकार को अल्पकालीन लाभ तो करा देगा किन्तु आनेवाले समय में हिन्दूस्थान के लिए घातक साबित होगा।

ए बी बर्धन: This budget is not only pro industrialists and anti poor but it is against secular fabric of this nation. There is no announcement for labor class. Farmers are not given due attention. Minorities are left out.

चंद्रशेखर : जो भाषण निर्मलाजी ने दिया उससे असहमत होते हुए भी मैं यह कहना चाहूंगा कि भाषण में देश के बारे में चिंता थी। उन्होंने हमारी चुनौतियों को समजने का प्रयास किया था। उन्होंने देश को एक दिशा में ले जाने के लिए हमें संकेत दिया था। ये बात दूसरी है कि इस के बारे में विभिन्न विचार हो और मेरे विचार उन से सहमत नहीं है। लेकिन आज जो बहस हो रही है मुझे ऐसा लगता है कि दोनों तरफ से केवल एक-दूसरे की आलोचना, एक-दूसरे पर कटाक्ष, पुराने गीत दोहराने की बातें, पुराने कुकृत्यों का बखान इस सदन में हुआ है।

बाल ठाकरे : देशाच्या विकासाचं इंजिन असलेल्या मुंबई आणि महाराष्ट्रावर या अर्थसंकल्पानं अन्याय केला आहे।

लालु प्रसाद यादव :  इस बजट में बेरोजगारों के लिए कुछ भी नहीं है। बिहार के लिए जो वादा किए थे, वह भी इस बजट में नहीं दिखा। गरीब, पीछडों और अल्पसंख्यको की उस में उपेक्षा की गई है।

नरेन्द्र मोदी: इस बजट में विकास दर बढ़ाने के लिए कोई रणनीति नजर नहीं आती है। एक तरफ जीडीपी का गिरना, दूसरी तरफ महंगाई का बढना। अब तो महंगाई के विषय में बोलना ही बंध कर दिया है। प्रधानमंत्रीजी, आप महंगाई कम कर पाओ ना कर पाओ, कम से कम २०१९ में पीछले प्रधानमंत्री जहां छोडकर गये थे, वहां लाकर तो रख दो।

(स्पष्टीकरण: १. इस आलेख का आशय केवल निर्दोष हास्य के लिए ही है, साथ में ८०-९० के दशक के राजनीतिज्ञो में विचारभिन्नता होने के यद्यपि भाषा की किनती शालीनता थी, यह दर्शाना भी है। २. कुछ स्मृति के आधार पर, कुछ प्रिन्ट/यूट्यूब विडियो के आधार पर)

 

Liked this article? To keep getting such articles, please support us.
Click Here

You may also like

Leave a Comment

Your donation can help this website keep running. Please donate from ₹ 10 to whatever you want.