शाहीनबाग, गोपाल के लिए कौन जिम्मेदार?

शाहीनबाग, गोपाल के लिए कौन जिम्मेदार?

by Jaywant Pandya
११ दिसम्बर जिस दिन #CAB पारित करवाया जा रहा था, उसी दिन मेरे द्वारा लिखी गई यह पॉस्ट उन पॉस्ट में से है जो सच हुई है। लेकिन इस पॉस्ट का सच होना मन को दुःखी कर रहा है। मैंने लिखा था यदि राम मंदिर, धारा ३७० जैसे मुद्दो पर सरकार द्वारा जैसी सतर्कता बर्ती गई वैसी बर्ती जायेगी तो तो ठीक है, वर्ना बूमरेंग होगी। आज वह सही हुआ है। आज ५० दिन के बाद सीएए के विरोध में क्या स्थिति हुई है यह याद कराना जरूरी है। सरजील ईमाम आसाम और इशान भारत को भारत से अलग करने का आशय सार्वजनिक रूप से रखता है, वह गो हत्या को भी उचित ठहराता है, गांधीजी और नहेरु को फासीवादी गिनाता है। संविधान भी फासीवादी है। लेकिन जब उस का अपने फायदे के लिए उपयोग करना हो तो करना चाहिए एसी सलाह भी देता है। पत्रकार आरफा खानम कहती है कि हमारी मजहबी पहचान, मजहबी नारे जब तक स्वीकार्य नहीं हो जाते, हमारी (मुस्लिमों की) जब तक आदर्श सोसायटी (अर्थात् शरिया वाली, इस्लामिक राष्ट्रवाली) नहीं बन जाती तब तक इन्क्लुझिव प्रॉटेस्ट करना है। हमने आइडियोलॉजी नहीं बदली, केवल रणनीति बदली है। दो विरोध प्रदर्शनकारी महिला एक विडियो में कहती है कि जब हमारी जनसंख्या बढ जायेगी तो हम हिन्दूओं को पटक पटक कर मारेंगे।

११ दिसम्बर २०१९ को लिखी गई मेरी फेसबुक पॉस्ट

 
काश्मीरी पंडितो को जिस दिन षडयंत्रपूर्वक निकाला गया उस दिन अर्थात् १९ जनवरी को शाहीनबाग के प्रदर्शन में जश्न ए शाहीन मनाया जाता है। एक वकील आर्थिक जिहाद की बात करता है। एएमयु छात्रसंघ का पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन कहता है कि मुस्लिम यदि चाहें तो किसी का भी सर्वनाश कर सकते है। जेएनयू की एक छात्रा आफरीन फातिमा एक भाषण में सर्वोच्च न्यायालय पर प्रश्न चिह्न खडा करती है। लेकिन सेक्युलर मिडिया चूप है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉंग्रेस के नेता तहीरुद्दीन सीएए विरोधी प्रदर्शन (जी हां सीएए विरोधी प्रदर्शन) पर फायरिंग करते है और दो लोगों की मृत्यु हो जाती है जिस में एक मुस्लिम भी है। लेकिन तब न तो ये सेक्युलर मिडिया और ट्विटर के से्कयुलर युझर इस्लामिक टेररिस्ट का ट्रेन्ड चलाते है। कॉंग्रेस समर्थित सरकार वाले राज्य झारखंड में सीएए समर्थन नीरज प्रजापति पर मुस्लिम भीड सलिये से वार करती है और दूसरे दिन उस की मृत्यु हो जाती है, लेकिन तब न तो कॉंग्रेस, न तो कोई अन्य सेक्युलर दल और ना ही ये एनडीटीवी समेत सेक्युलर मिडिया मॉब लिंचिंग का नाम देकर उस का घंटो तक विश्लेषण करते है। मध्य प्रदेश में तो मुस्लिम लोगों द्वारा एक दलित को जींदा जलाया जाता है लेकिन उस पर असहिष्णुता, एवॉर्ड वापसी, मोब लिंचिंग आदि किसी तरह के campaign नहीं चलते।
 
लेकिन इन सब से त्रस्त हो कर गोपाल नामक अल्पवयस्क युवक द्वारा एक देशी कट्टे से गोलीबार की घटना को तुरंत हिन्दू आतंकवाद से जोड दिया जाता है।
लेकिन यह शाहीनबाग, देश भर में हो रहे सीएए विरोध, उस में हो रही हिंसा, हिन्दू प्रतीको को गालियां, हिन्दूओं से चाहिए आझादी, जिन्नावाली आझादी एसे सूत्रो आदि बातों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या इस सच्चाई का पता कभी चल पायेगा? क्या पीएफआई शामिल है? क्या कॉंग्रेस शामिल है? या आआप शामिल है?इस के पीछे जो भी है उस के विरुद्ध कडी कारवाई नहीं हुई तो एसे तत्त्वों का उत्साह बढेगा ही।
 
गुजरात में पाटीदार आंदोलन समय आधी रात पुलीस कार्यवाही करनी वाली भाजप जब दिल्ली पुलीस उन के पास है और एसे भडकाउ भाषण, हिन्दू प्रतीको का अपमान जहां हो रहा है एसे शाहीनबाग विरोध प्रदर्शन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही? हालांकि दिल्ली हाइ कॉर्टने शाहीनबाग विरोध प्रदर्शन से ट्राफिक में आ रही समस्या को लेकर पुलीस को कारवाई करने का आदेश दिया था, फिर भी पुलीस कारवाई क्यों नहीं कर पाई? क्या बडा वॉट बॅन्क पाटीदारों से न डरनेवालें  जेहादी मानसिकतावाले मुस्लिमों से डर गये है? या फिर वह इन की उपेक्षा कर के इन को फ्रस्टेट कर के भडाश निकाल देना चाहते है?
 
कॉंग्रेस (जिस के नेता शशी थरूर, दिग्विजयसिंह और मणिशंकर अय्यर जो कि लाहोर से तुरंत दिल्ली के शाहीनबाग पहोंच गये थे) भी मंथन करे कि जो मानसिकता गांधीजी और नहेरु को भी फासीवादी गिनाती है, उसे अब भी राजनीति के लिए समर्थन करेंगे?
 
एसा न हो कि सरकार की निष्क्रियता, विपक्षी राजनैतिक दलों का देशविरोधी तत्त्वों को समर्थन, कॉर्ट द्वारा ढीलापन सेक्युलर मिडिया द्वारा एसे जिहादी तत्त्वों का बचाव व समर्थन देश में ओर गोपाल पैदा न करें। आज तो गोपाल ने केवल देशी कट्टे से गोलीबार किया था…आज हम सभी नहीं जागे तो….

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